क्या भारत-पाकिस्तान में फिर होगी जंग?
भारत और पाकिस्तान का रिश्ता हमेशा से उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। 1947 के बंटवारे के बाद से अब तक दोनों देशों के बीच कई बार युद्ध हो चुके हैं। 1947, 1965 और 1971 की लड़ाइयाँ इतिहास में दर्ज हैं, वहीं 1999 का कारगिल युद्ध आज भी याद किया जाता है। ऐसे में अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या आने वाले समय में भारत और पाकिस्तान के बीच एक और युद्ध हो सकता है?
ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
भारत-पाकिस्तान के रिश्ते शुरू से ही कश्मीर मुद्दे पर उलझे रहे हैं। पाकिस्तान लगातार कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाना चाहता है, जबकि भारत इसे अपना आंतरिक मामला मानता है। 1971 के युद्ध में पाकिस्तान को भारी हार का सामना करना पड़ा और बांग्लादेश का जन्म हुआ। उसके बाद भी सीमा पर तनाव और आतंकी गतिविधियों के कारण दोनों देशों के रिश्ते कभी सामान्य नहीं हो पाए।
हाल के वर्षों की स्थिति
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है।
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2016 में सर्जिकल स्ट्राइक: उरी हमले के बाद भारतीय सेना ने पीओके में जाकर आतंकी ठिकानों पर हमला किया।
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2019 में पुलवामा हमला और बालाकोट एयरस्ट्राइक: इस घटना ने दोनों देशों के बीच तनाव को चरम पर पहुँचा दिया। भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के अंदर घुसकर आतंकी ठिकानों को नष्ट किया।
इन घटनाओं ने यह साफ कर दिया कि भारत अब आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा और जरूरत पड़ने पर पाकिस्तान को सीधा जवाब देगा।
मौजूदा भू-राजनीतिक हालात
आज की दुनिया 1947 या 1971 जैसी नहीं है।
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पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। महंगाई, बेरोजगारी और कर्ज़ के बोझ से पाकिस्तान जूझ रहा है। ऐसे हालात में उसके लिए युद्ध करना लगभग असंभव है।
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भारत आज दुनिया की उभरती महाशक्ति है। उसकी अर्थव्यवस्था, सैन्य शक्ति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति दोनों मजबूत हैं। अमेरिका, रूस, फ्रांस जैसे देश भारत के साथ खड़े दिखाई देते हैं।
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चीन का प्रभाव जरूर एक बड़ा फैक्टर है, क्योंकि पाकिस्तान का सबसे बड़ा सहयोगी चीन है। लेकिन चीन भी सीधे युद्ध में कूदने से बचना चाहता है।
क्या युद्ध संभव है?
युद्ध हमेशा आखिरी विकल्प होता है। भारत और पाकिस्तान दोनों जानते हैं कि युद्ध से सिर्फ नुकसान होगा – आर्थिक, राजनीतिक और मानवीय।
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परमाणु हथियार दोनों देशों के पास हैं। इसका मतलब है कि किसी भी बड़े युद्ध की स्थिति में दोनों देशों के लिए खतरा कई गुना बढ़ जाएगा।
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अंतरराष्ट्रीय दबाव भी युद्ध को रोकने का काम करता है। अमेरिका, रूस, संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय देश नहीं चाहेंगे कि दक्षिण एशिया में अस्थिरता फैले।
विशेषज्ञों की राय
कई रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और पाकिस्तान के बीच सीधे युद्ध की संभावना बहुत कम है। हाँ, सीमा पर छोटी-मोटी झड़पें, गोलीबारी और आतंकवादी हमले जारी रह सकते हैं। लेकिन पूरी तरह युद्ध छेड़ना दोनों के लिए आत्मघाती साबित होगा।
भारत का ध्यान आज अपनी अर्थव्यवस्था और वैश्विक नेतृत्व पर है, वहीं पाकिस्तान घरेलू संकटों से जूझ रहा है।
भविष्य की संभावनाएँ
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तनाव जारी रहेगा – सीमा पर तनाव और आतंकी गतिविधियाँ पूरी तरह खत्म नहीं होंगी।
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युद्ध की संभावना कम है – हालाँकि अचानक किसी बड़े आतंकी हमले से स्थिति बिगड़ सकती है।
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कूटनीति की भूमिका – भविष्य में शांति वार्ता और आर्थिक सहयोग ही रिश्तों को सुधार सकते हैं।
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जनता की उम्मीदें – भारत और पाकिस्तान दोनों देशों की आम जनता शांति चाहती है, क्योंकि युद्ध का सबसे ज्यादा नुकसान आम लोगों को ही उठाना पड़ता है।
निष्कर्ष
भारत और पाकिस्तान के रिश्ते जटिल हैं, लेकिन सीधा युद्ध होने की संभावना बहुत कम है। दोनों देशों के पास परमाणु हथियार हैं और अंतरराष्ट्रीय दबाव भी उन्हें युद्ध से रोकता है। हाँ, सीमा पर तनाव और आतंकवाद की समस्या बनी रहेगी। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दोनों देश राजनीति से ऊपर उठकर शांति और विकास की राह चुन पाएँगे?


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