नेपाल की राजनीति एक बार फिर बड़े मोड़ पर पहुंच गई है। देशभर में चल रहे विरोध प्रदर्शनों (Nepal Protest 2025) ने सरकार को हिलाकर रख दिया है। खबरों के अनुसार, नेपाल की पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुषिला कार्की (Sushila Karki) को आज अंतरिम प्रधानमंत्री (Interim Prime Minister) के रूप में शपथ दिलाई जा सकती है।
सुषिला कार्की कौन हैं?
सुषिला कार्की नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रह चुकी हैं। उन्होंने न्यायपालिका में अपने कार्यकाल के दौरान कई ऐतिहासिक फैसले दिए और अपनी ईमानदार छवि के लिए जानी जाती हैं।
अब जब नेपाल में राजनीतिक संकट गहराता जा रहा है, तो उन्हें अंतरिम प्रधानमंत्री बनाए जाने की संभावना से देशवासियों में उम्मीद जगी है कि शायद देश को एक स्थिर नेतृत्व मिल सके।
नेपाल में विरोध प्रदर्शनों की वजह
नेपाल में इन दिनों जनता सड़कों पर क्यों उतरी है?
1. सरकार के खिलाफ असंतोष – जनता का मानना है कि मौजूदा सरकार उनकी समस्याओं का समाधान
नहीं कर पा रही।
2. बेरोजगारी और महंगाई – देश की आर्थिक स्थिति कमजोर है और बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है
राजनीतिक अस्थिरता – पिछले एक दशक से नेपाल में स्थिर सरकार का अभाव है।
3. संवैधानिक संकट – संविधान की कई धाराओं को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद जारी हैं।
LIVE Updates (12 सितम्बर 2025)
◾ भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच राजधानी काठमांडू में प्रदर्शन जारी।
◾ सुप्रीम कोर्ट और राजनीतिक दलों के नेताओं की अहम बैठक।
◾ सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति भवन में शपथ ग्रहण की तैयारियां शुरू।
◾ अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने नेपाल की स्थिति पर चिंता जताई।
◾ भारत और चीन की नजर नेपाल के घटनाक्रम पर टिकी।
अंतर्राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य
नेपाल की राजनीतिक अस्थिरता सिर्फ उसके लिए ही नहीं बल्कि पड़ोसी देशों के लिए भी चिंता का विषय है। भारत और चीन जैसे बड़े देशों के रणनीतिक हित नेपाल से जुड़े हैं।
◾ भारत – नेपाल के साथ खुली सीमा और सांस्कृतिक रिश्तों की वजह से भारत को हर राजनीतिक परिवर्तन
का असर झेलना पड़ता है।
◾ चीन – नेपाल को अपने “Belt and Road Initiative” में शामिल करना चाहता है, इसलिए वह भी घटनाक्रम
पर बारीकी से नजर रखे हुए है।
जनता की उम्मीदें
नेपाल की जनता चाहती है कि:
◾ स्थिर सरकार बने।
◾ बेरोजगारी और महंगाई कम हो।
◾ शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हो।
◾ भ्रष्टाचार पर अंकुश लगे।
सुषिला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाए जाने से जनता को लगता है कि राजनीतिक दलों से अलग एक ईमानदार नेतृत्व उभर सकता है।
भविष्य की चुनौतियाँ
हालांकि अंतरिम प्रधानमंत्री बनने के बाद भी चुनौतियाँ कम नहीं होंगी:
1. राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाना।
2. नए चुनाव की तैयारी।
3. जनता का विश्वास बहाल करना।
4. अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को संतुलित करना।
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निष्कर्ष
नेपाल इस समय एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है। सुषिला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाए जाने की संभावना देश में नई उम्मीद जगाती है। लेकिन क्या इससे राजनीतिक स्थिरता आ पाएगी, यह आने वाला समय बताएगा।




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